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स्वामी कैलाशानंद गिरि जीNiranjan Peethadheeshwar

शिक्षा

उपदेश एवं शिक्षा

वेद से आचरण तक — पूज्य गुरुदेव की शिक्षा के मूल विषय।

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सनातन धर्म

पूज्य गुरुदेव की शिक्षा इस आधार से आरम्भ होती है कि सनातन धर्म कोई वाद-विवाद का विषय नहीं, अपितु सहस्राब्दियों से परीक्षित जीवन-पद्धति है। उनके प्रवचन बार-बार आचरण पर लौटते हैं — मनुष्य तब क्या करता है जब कोई देख नहीं रहा, और क्या उसका दैनिक जीवन उसके कथन से मेल खाता है।

02

वेद एवं उपनिषद्

सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से वैदिक शिक्षा में आचार्य उपाधि प्राप्त होने के कारण वे केवल भाष्य पर नहीं, मूल पर आश्रित होते हैं। वेद, पुराण एवं उपनिषद् उनके लिए जीवंत ग्रंथ हैं — संस्कृत में उद्धृत, फिर सरल हिन्दी में इस प्रकार खोले गए कि अप्रशिक्षित श्रोता भी तर्क का अनुसरण कर सके।

03

तपस्या एवं अनुशासन

उनकी अपनी साधना ही उनका सबसे स्पष्ट उपदेश है। श्रावण मास पर्यंत वे प्रतिदिन लगभग चौदह घंटे भगवान शिव का महारुद्राभिषेक करते हैं और सम्पूर्ण मास मौन व्रत धारण करते हैं। वर्ष-प्रति-वर्ष निभाई गई इसी तपस्या ने वर्षा ऋतु में सैकड़ों श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर आकृष्ट किया।

04

सेवा ही साधना

उनकी शिक्षा में सेवा पूजा के पश्चात् किया जाने वाला दान नहीं — सेवा ही पूजा है। अन्न क्षेत्र, वेद विद्यालय, गौशाला एवं निर्धन बालकों का निःशुल्क छात्रावास इसीलिए हैं कि जो करुणा केवल भाव तक सीमित रह जाए, वह अपूर्ण मानी जाती है। सच्ची करुणा, वे कहते हैं, शरीर, मन एवं आत्मा की आवश्यकताओं को समझना है।

अमृत वचन

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