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स्वामी कैलाशानंद गिरि जीNiranjan Peethadheeshwar

सिद्धपीठ श्री दक्षिण काली मंदिर

शक्ति की सिद्ध पीठ

नील पर्वत की गोद में, गंगा के तट पर — शक्ति की एक सिद्ध पीठ।

सुखी एवं समृद्ध जीवन हेतु आराधना का केंद्र माना जाने वाला दक्षिण काली मंदिर ऐसी शक्तियों से युक्त कहा जाता है जो मृत्यु को भी मोड़ सकती हैं। यहाँ देवी की आराधना करने वालों को सौभाग्य तथा रोग एवं क्षति से मुक्त जीवन प्राप्त होता है।

यह मंदिर हरिद्वार में नील पर्वत की गोद में स्थित है, जिसके चरणों में गंगा प्रवाहित होती हैं। इस प्रतिष्ठा का दक्षिण काली मंदिर भारत में केवल दो स्थानों पर कहा जाता है — एक कोलकाता में और एक हरिद्वार में। भैरव, भगवान शिव का ही एक स्वरूप, स्वयं इसकी रक्षा करते हैं, और यह मंदिर एक कुण्ड के ऊपर स्थित है जो विशेष शक्ति से युक्त माना जाता है।

स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, कोलकाता से आए माँ दक्षिण काली के भक्त एवं शिव उपासक गुरु कामराज जी ने देवी की प्रतिमा को गर्भगृह से निकालकर नील पर्वत पर स्थापित किया। तब से यह प्रतिमा इसी मंदिर में विराजमान है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती है। नवरात्रि पर्व पर विशेष पूजा सम्पन्न होती है।

चित्र दीर्घा

मंदिर के दर्शन

गर्भगृह में माँ दक्षिण काली
गर्भगृह में माँ दक्षिण काली
मंदिर प्रांगण
मंदिर प्रांगण
पुष्प शृंगार
पुष्प शृंगार
रुद्राभिषेक
रुद्राभिषेक
गंगा तट पर शिवलिंग
गंगा तट पर शिवलिंग
हवन
हवन