सनातन धर्म
जीवंत परम्परा, उसके शास्त्र एवं आचरण।

अमृत वचन
सुनें, मनन करें, और सनातन धर्म की दृष्टि को अपने जीवन में उतारें।
अमृत वाणी
सच्ची करुणा का अर्थ है — शरीर, मन और आत्मा की आवश्यकताओं को समझना।
प्रेम करने का अर्थ है सेवा करना, और सेवा करने का अर्थ है प्रसन्न करना।
भगवान से ज़्यादा कर्मों से डरिए, एक बार भगवान तो माफ़ कर सकता है, लेकिन कर्म नहीं।
मनुष्य धर्म की रक्षा करें तो धर्म भी उसकी रक्षा करता है।
विषय
जीवंत परम्परा, उसके शास्त्र एवं आचरण।
आजीवन वैदिक अध्ययन से उपजे प्रवचन।
योग अर्थात् मिलन — व्यायाम नहीं, अनुभूति।
करुणा, कर्तव्य एवं सेवा — साधना के रूप में।