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स्वामी कैलाशानंद गिरि जीNiranjan Peethadheeshwar

अमृत वचन

सुनें। मनन करें। जानें।

सुनें, मनन करें, और सनातन धर्म की दृष्टि को अपने जीवन में उतारें।

अमृत वाणी

वचन जो स्मरण रहें

सच्ची करुणा का अर्थ है — शरीर, मन और आत्मा की आवश्यकताओं को समझना।

स्वामी कैलाशानंद गिरि जी

प्रेम करने का अर्थ है सेवा करना, और सेवा करने का अर्थ है प्रसन्न करना।

स्वामी कैलाशानंद गिरि जी

भगवान से ज़्यादा कर्मों से डरिए, एक बार भगवान तो माफ़ कर सकता है, लेकिन कर्म नहीं।

स्वामी कैलाशानंद गिरि जी

मनुष्य धर्म की रक्षा करें तो धर्म भी उसकी रक्षा करता है।

स्वामी कैलाशानंद गिरि जी

विषय

उपदेश के विषय

सनातन धर्म

जीवंत परम्परा, उसके शास्त्र एवं आचरण।

वेद एवं उपनिषद्

आजीवन वैदिक अध्ययन से उपजे प्रवचन।

योग एवं ध्यान

योग अर्थात् मिलन — व्यायाम नहीं, अनुभूति।

सेवा एवं जीवन

करुणा, कर्तव्य एवं सेवा — साधना के रूप में।