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स्वामी कैलाशानंद गिरि जीNiranjan Peethadheeshwar

1 April 2025

माँ चंद्रघंटा देवी दुर्गा के नौ रूपों में से तीसरा रूप हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन इनकी पूजा की जाती है। इनका स्वरूप अति दिव्य और तेजस्वी है। माँ चंद्रघंटा का नाम उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के घंटे के आकार में विराजमान होने के कारण पड़ा।

माँ चंद्रघंटा देवी दुर्गा के नौ रूपों में से तीसरा रूप हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन इनकी पूजा की जाती है। इनका स्वरूप अति दिव्य और तेजस्वी है। माँ चंद्रघंटा का नाम उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के घंटे के आकार में विराजमान होने के कारण पड़ा।

इनकी आराधना से भक्तों को शौर्य, साहस और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। माँ की कृपा से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। माँ चंद्रघंटा साधकों को आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करती हैं।

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥