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माँ ब्रह्मचारिणी माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। “ब्रह्मचारिणी” का अर्थ है तपस्या करने वाली, जो ज्ञान, त्याग, और भक्ति का प्रतीक हैं।

🌺माँ ब्रह्मचारिणी माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। “ब्रह्मचारिणी” का अर्थ है तपस्या करने वाली, जो ज्ञान, त्याग, और भक्ति का प्रतीक हैं।🌺
🌺इनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल रहता है।
ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और इनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी व सौम्य होता है।
इनका वाहन वृषभ (बैल) है।🌺
🌺माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक कठिन उपवास करने और अन्न-जल तक त्याग देने के कारण इन्हें “ब्रह्मचारिणी” कहा गया। उनकी इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।🌺
🌺भक्तों को संयम, तपस्या, और त्याग की प्रेरणा मिलती है।जीवन में धैर्य और आत्मसंयम को बढ़ाने में मदद करती हैं।उनकी कृपा से साधकों को ज्ञान और विजय की प्राप्ति होती है।🌺